जब जब हर्षद को पूजेंगे
जाने कितने राजू पनपेंगे
दुर्नीति, दुराचार, दुष्टता करेंगे
जग-भर में बहुख्याति पायेंगे
लूट खसोट कर सुख भोगेंगे
खबरियों के भाग्योदय करेंगे
जब नटवर महिमामंडित होंगे
जाने कितने राजू पनपेंगे
नटवर-हर्षद आदर्श हों जिनके
खबरिया जग में चर्चे उनके
हर कुकर्मी यथावत गुणगान पायेंगे
तभी तो पंधेर-से पापी छूटेंगे
जब-जब शोभराज-प्रणय गीत भजेंगे
जाने कितने राजू पनपेंगे
लाला, तिलक, भगत को भूलेंगे
आजादजी को विस्मृत कर देंगे
बोस के निर्वाण पर राजनीति करेंगे
अब्दुल हमीद- अश्फाक को छोड़
जब जब अबू सलेम गायेंगे
जाने कितने राजू पनपेंगे
सत्पथियों पर प्रश्न कसेंगे
खलनायक की ओर झुकेंगे
सैफ को लंगडा त्यागी देखेंगे
शाहरुख़ में जब बाजीगर ढूंढेंगे
किडनी चोर को जब किंग कहेंगे
जाने कितने राजू पनपेंगे
जाने कितने राजू पनपेंगे
गली-गली कुत्ते राज करेंगे
नग्नता के नए आयाम रचेंगे
खबरियों के दिन चरम पर होंगे
‘मन’ कहो वो दिन कैसे होंगे ![]()
जब इतने सारे राजू पनपेंगे

