Mojo – in poetic prime

Some poetic compositions..by MoJo

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ओ इज्यु मेरि! कस अंधेर है गो

Posted by Mohan on July 26, 2011

ओ इज्यु मेरि! कस अंधेर है गो
जाड़ बठी टुक तलक
संत्री बठी, प्रधानमंत्री तलक
सबै झुट्ठै – झूट बोलनी
जत्तू है सकें, तत्तुक बोलनी
साच्ची बोलना में फटकार मिलनी
झुट्टी बोलानाकि पुरस्कार मिलनी
कस देस है गो, कस समय ऐ गो
ओ इज्यु मेरि! कस अंधेर है गो

शिक्षित कूनी जैसि चोरि करनि ऊनी
नि करि सकि जबत उई अनपढ़ कूनी
स्वाभिमान न आत्म-सम्मान राखनी
दुई डबल खातिर सब बेचि खानी
न संस्कार न संस्कृतिक मोल राखनी
नांगै रूनी, सबकै नांगै देखनी
कस सब्यता कस समाज है गो
ओ इज्यु मेरि! कस अंधेर है गो

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१४११ (चौदह सौ ग्यारह) बचे हैं, तुझे मिला के, मुझे मिला के |

Posted by Mohan on February 20, 2010


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

save tiger

१४११ (चौदह सौ ग्यारह) बचे हैं,
तुझे मिला के, मुझे मिला के |

तुम शावक व्याघ्र हो, मैं वयस्क हूँ
कुछ बूढ़े हैं, कुछ हम जैसे हैं
गिनती के अब कुछ ही बचे हैं,
तुझे मिला के, मुझे मिला के ||

पर कुल का, पर, निज जाति का है तू
सहज वृत्ति कि, तेरा भक्षण कर दूँ
भविष्यत निश्चित प्रतिद्वंद्विता घटा दूँ
जो अब तक हुआ है, वो अब भी कर दूँ
फिर चौदह सौ दस ही बचेंगे
तुझे मिटा के, मुझे मिला के ||

न शोचता, जो मैं बनराज ही होता
मनु वंशियों को निज सत्ता न खोता
या फिर उनका ये अत्याचार न होता
जो व्याघ्र समुदाय लुप्तप्राय न होता
ये हमें लुप्त करके ही दम लेंगे
तुझे मिटा के, मुझे मिटा के ||

संभवतः तू नहीं सोचेगा
तरुण बन तू मुझसे लड़ेगा
मुझ बूढ़े पर प्रहार करेगा
मेरा समय जब अवसान पर होगा
पर शायद तब हम कम न रहेंगे
तुझे मिला के, मुझे मिटा के

वृत्ति विरुद्ध अब कृत्य करूँगा
भक्षण न कर, तेरा संरक्षण करूँगा
तुझ अनाथ का अब पालक बनूँगा
सूत्रपात कर, इस यज्ञ का सूत्रधार बनूँगा
हे कर्णधार, हम जीतेंगे
तुझे जिता के, मुझे जिता के

१४११ (चौदह सौ ग्यारह) बचे हैं,
तुझे मिला के, मुझे मिला के

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