Mojo – in poetic prime

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अब मत बख़्शो भू-भारों को, फाँसी दो गद्दारों को

Posted by Mohan on February 16, 2016

अब मत बख़्शो भू-भारों  को, फाँसी दो गद्दारों को।
बाघी पैदा हुआ था इक जयचंद
मिटाने आपसी, बैरी बुला लाया जयचंद
देश मिटाकर, खुद भी पशुवत् मारा गया जयचंद
अपयश पा, सदियों तक गुलामी लाया जयचंद
ना मौक़ा दो, फिर से इन मतिमारों को
फाँसी  दो गद्दारों को।
पीठ में खंजर सिराज के घोंपा था मीर जाफर ने
दो सौ साल लूटा भारत, मुट्ठी भर अंग्रेजों ने
सत्ता तो दूर, जीवन भी छीना, मूरख से, परदेशी ने
समय समय पर भारत को छलनी है किया इन दुष्टों ने
करो दूर,  आत्महन्ता, ज़हर भरे जल्लादों को
फाँसी दो गद्दारों को
अब मत बख़्शो भू-भारों  को, फाँसी दो गद्दारों को।

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