Mojo – in poetic prime

Some poetic compositions..by MoJo

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कुछ नाम तो होगा !

Posted by Mohan on March 22, 2009

आप लोग भी शायद इन परिस्थितियों से दो चार हुए होंगे कि आपको नाम मालूम न हो | फ़िर पता करने की कोशिश की हो और ज्यादा सफल न हों | इस उधेड़-बुन में मैंने भी एक बार कुछ लिखा पर पूरा नहीं लिख पाया, शायद सो गया था | अब यदि पूरा करूँगा तो ये ठीक नहीं होगा क्योंकि अब मालूम है | सो जैसा उस समय लिखा था वैसा ही पोस्ट कर रहा हूँ बस एक आध पंक्तियाँ ऊपर-नीचे कर रहा हूँ |

 

आप अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें ये मैं आप लोगों से प्रार्थना करता हूँ |

 

धन्यवाद् ||

   

 तो आखिर क्या नाम होगा???

 

 कुछ नाम तो होगा !

ह्रदय को चमत्कृत करती ज्योति

मन की वीणा , मुख की वाणी

मधुकर की गुंजन, शशि, श्रुति या कंचन,

मधु, माधुरी, महिमा या माया

सोच रह हूँ, मृग-मरीचिका या चटक तृष्णा

नाम रहित तो नहीं रखा होगा

तो फिर कुछ नाम तो होगा

 

आभा, शोभा, प्रभा या वशुधा होगा

रति, मति, लता, कला या कमला होगा

मेरी लेखनी और मन के समीप रहती कविता होगा

कामिनी, दामिनी, रागिनी या मोहिनी होगा

विप्रलब्धा, भानुप्रिया या हरिप्रिया होगा

अंकु हो, अंकिता हो, अंशु या अंजलि होगा

मन विव्हल कर दिया सुमुखी तुमने

पर फिर भी कुछ नाम तो होगा

 

मन वीणा को झंकृत किया, अभिलाषा हो क्या

मन मयूर नामों के सावन में झुमा, संगीता हो क्या

मन उद्वेलित हुआ, आंदोलन करता, क्रांति हो क्या

मध्य रात्रि पर हर दिशा अलंकृत, किरण हो क्या

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तो आखिर क्या नाम होगा???

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