Mojo – in poetic prime

Some poetic compositions..by MoJo

Posts Tagged ‘poetry’

बचपन में बड़ा बोझ रे बाबा

Posted by Mohan on March 23, 2009


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

कभी-कभी जब प्रातः भ्रमण को जाता हूँ तो पार्क के रस्ते में एक प्रतिष्ठित कॉन्वेंट स्कूल पड़ता है | कारों से बड़ा-बड़ा बोझ निकालते हुए छोटे-छोटे बच्चे दिखते हैं | उन्हें देख कर मन कुंठित हो उठता है | उसी कुंठा में एक दिन लिख बैठा| अपनी प्रतिक्रिया अवश्य व्यक्त कीजियेगा |

धन्यवाद

मोहन (मोजो)

 

बचपन और बोझ

बचपन और बोझ

 

 

 

 

बचपन में बड़ा बोझ रे बाबा !!

 

एक-आध में पढ़ते होंगे

दीर्घ शंका में खेलते होंगे

इकटक चीजों को देखते होंगे

बच्चे हैं सो बचपन रे बाबा

मुख की मुस्की खोई रे बाबा

पीठ में जो इतना बोझ रे बाबा

बचपन में बड़ा बोझ रे बाबा !!

 

पाठशाला को ही जाते हैं

पर ज्यों अखाड़े को जाते रे बाबा

पहलवान के कंधे पे मुद्गल जैसे

वैसा झोला ढ़ोते रे बाबा

फिर मास्टरनी की डपट रे बाबा

घर पर पिजड़ा बाहर जेल

पियू बना तोता रे बाबा

बचपन में बड़ा बोझ रे बाबा!!

 

और हम….

छठवे बरस तो पाठशाला गए

वो भी कभी गए कभी नहीं रे बाबा

मिला पहला डपटने वाला

जिस पर माँ भी न भड़की रे बाबा

वरना माँ के गुस्से के आगे

कहाँ कोई बचा रे बाबा

वो तो मास्टरजी रे बाबा

सो कभी गए, कभी नहीं रे बाबा

पुरे छः वर्षों माटी में खेले

पेड़ों पर झूले, खेतों में दौड़े

फिर पाठशाला की दहलीज़ रे बाबा

पर अबके….

बचपन में बड़ा बोझ रे बाबा!!

 

कोमल पंखुड़ियों से हाथ

चंचल तितलियों सी नैना

फूलों से मधुर मुस्कान

माथे पर लकीर, पीठ में झोला रे बाबा

यूं लाख्ताकिये से उतरते रे बाबा

न जानूं, सही या गलत

देखता हूँ, लगे बुरा रे बाबा

लगे ज्यों जग का सारा भर

इन नन्हे कोमल काँधों पर रे बाबा

अबके ……

बचपन में बड़ा बोझ रे बाबा !!!!

Posted in बचपन में बड़ा बोझ रे बाबा, हिंदी | Tagged: , , , , , , , , , , , , , | 3 Comments »

कुछ नाम तो होगा !

Posted by Mohan on March 22, 2009

आप लोग भी शायद इन परिस्थितियों से दो चार हुए होंगे कि आपको नाम मालूम न हो | फ़िर पता करने की कोशिश की हो और ज्यादा सफल न हों | इस उधेड़-बुन में मैंने भी एक बार कुछ लिखा पर पूरा नहीं लिख पाया, शायद सो गया था | अब यदि पूरा करूँगा तो ये ठीक नहीं होगा क्योंकि अब मालूम है | सो जैसा उस समय लिखा था वैसा ही पोस्ट कर रहा हूँ बस एक आध पंक्तियाँ ऊपर-नीचे कर रहा हूँ |

 

आप अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें ये मैं आप लोगों से प्रार्थना करता हूँ |

 

धन्यवाद् ||

   

 तो आखिर क्या नाम होगा???

 

 कुछ नाम तो होगा !

ह्रदय को चमत्कृत करती ज्योति

मन की वीणा , मुख की वाणी

मधुकर की गुंजन, शशि, श्रुति या कंचन,

मधु, माधुरी, महिमा या माया

सोच रह हूँ, मृग-मरीचिका या चटक तृष्णा

नाम रहित तो नहीं रखा होगा

तो फिर कुछ नाम तो होगा

 

आभा, शोभा, प्रभा या वशुधा होगा

रति, मति, लता, कला या कमला होगा

मेरी लेखनी और मन के समीप रहती कविता होगा

कामिनी, दामिनी, रागिनी या मोहिनी होगा

विप्रलब्धा, भानुप्रिया या हरिप्रिया होगा

अंकु हो, अंकिता हो, अंशु या अंजलि होगा

मन विव्हल कर दिया सुमुखी तुमने

पर फिर भी कुछ नाम तो होगा

 

मन वीणा को झंकृत किया, अभिलाषा हो क्या

मन मयूर नामों के सावन में झुमा, संगीता हो क्या

मन उद्वेलित हुआ, आंदोलन करता, क्रांति हो क्या

मध्य रात्रि पर हर दिशा अलंकृत, किरण हो क्या

………………………………………….

तो आखिर क्या नाम होगा???

Posted in कुछ नाम तो होगा, हिंदी | Tagged: , , , , , , , , | 9 Comments »